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Showing posts from 2024

Differential curves are straight in nature

मैं बधाओं से लड़ते आया हूँ l अपनों के दुख हरते आया हूँ l देर लगी है मुझको आने में पर,  मैं सीधे रस्ते पे चलके आया हूँ l "Trust the process, patience will perish the perilous worries of life." -नितिन प्रताप सिंह 

Embrace your lowness gracefully

गुंजाईश की इंटों से बने मोहब्बत के मकानों में, तकलीफें आती हैं मगर ठहरती नहीं हैं, -Hurdles sublime in front of latent heat of love and cooperation  -नितिन प्रताप सिंह 

करवाचौथ

सज संवर श्रृंगार करके सामने जो आयी हो l क्या समूचे विश्व के सौंदर्य को हर लायी हो l गुमशुदी से चाँद की सब लोग हैं सदमें में, तुम  चाँद को माथे पे बिंदी की जगह ले आयी हो l      " Will try together , will cry together , will    solve together , and finally will evolve together " - Nitin Pratap Singh 

Acceptance of Susceptible Circumstances

बड़े से भी बड़ा इंसान परेशान हो ही सकता है, दिखाता राह औरों को वो रस्ता खो भी सकता है,  समझदारी भरा इंसान कभी तो रो ही सकता है,  भरोसा बाँटने वाले को धोखा हो भी सकता है, Nothing is permanent, change is the only constant -नितिन प्रताप सिंह 

Economics of fragile friendship

बेरोजगारी में भी जिनके होने से बेगैरत न थी,  आज कमाई ने हमसे वो शख्स छीन लिए, -नितिन प्रताप सिंह 

Commodification of relations

बिक गए कुछ शौक सस्ते में भरी बाज़ार में,  लोग बंटवारे को लेकर लड़ रहे परिवार में | मतलबी हैं लोग जिनकी हैं फरेबी आदतें, बिक रहा है अब भरोसा संबंधों के व्यापार में | -नितिन प्रताप सिंह 

Archeology of human identity

कुछ ईंट पत्थरों से पहचाने जाएंगे,  हम मिट्टी हैं और मिट्टी में मिल जाएंगे, -नितिन प्रताप सिंह 

Indomitable mental scars

बात बात पर जान छिड़कने वाली लड़की, मुझ पर खुद से ज्यादा मरने वाली लड़की, अपनी बातें खुलकर कहने वाली लड़की, दिल के घर में छुपकर रहने वाली लड़की, - नितिन प्रताप सिंह 

Mother's Day

तरक्कीयों के दौर में माँ से प्राप्त स्नेह और भरोसा, मनुष्य का सबसे बड़ा नोबेल पुरस्कार है - नितिन प्रताप सिंह 

Exothermic hope of writing

है हताशा ये कि रचना खास क्यों होती नहीं  पर कलम उम्मीद में दिन रात सोती ही नहीं  Keeping alive your writings is endothermic in nature  -नितिन प्रताप सिंह 

Appreciation of social behaviour

कितनी बार गिरा हूँ संभलने से पहले कोई ये भी पूछे मेरे चलने से पहले Success is visible at the cost of anonymous but invaluable struggles. - नितिन प्रताप सिंह 

मेरे राम

जो भी हो परिणाम मगर मैं सत्य कहूंगा, भीड़ में नफ़रत की नेकी के साथ चलूँगा l ज्ञात नहीं है कितने रावण हैं दुनियाँ में, हाँ मैं लेकिन अपने घर का राम बनूँगा l -नितिन प्रताप सिंह 

Volatile life

ये कहाँ मुमकिन कि हर दिन ज़िंदगी सीधी चले, अनगिनत हैं मोड़ रास्तों में जो मंजिल ले चले l आज खुशियों की बहारें हैं मगर पर जान लो, हो भी सकता है कि कल से गम की एक आंधी चले l -Inspired by volatility in life -Nitin Pratap Singh