कठिन वक़्त है,विश्व त्रस्त है
मानो जैसे प्रकृति रुष्ट है,
एक महामारी के चलते
देखो पूरा विश्व ध्वस्त है,
खौफ दिलों में ऐसे है कि
जैसे मानो विश्व खत्म है,
चारों ओर गमों की गर्मी
सूखा सा खुशियों का दरख्त है,
एक नहीं दो देश नहीं अब
पूरी दुनियाँ अस्त व्यस्त है,
फेल हुए हैं देश अग्रणी
इटली जैसा मुल्क़ पस्त है,
कोरोना की रोकथाम में
देशों की सरकार व्यस्त है,
जिसे हुआ कोरोना उसका
लोगों से संपर्क खत्म है,
हैं खतरे में सभी मग़र पर
वृद्ध जगत को अधिक कष्ट है,
मौत हुई हैं दुनियाँ भर में
घर घर में इंसान स्तब्ध है,
नहीं मिला उपचार अभी तक
सारी कोशिश हुई व्यर्थ है,
कोई तो कुछ खोज निकाले
ईश्वर से कह रहा भक्त है,
बंद पड़े हैं शेयर मार्केट
अर्थव्यवस्था हुई ध्वस्त है,
खाली हुई रेल की पटरी
भारत हुआ भीड़ मुक्त है,
घर में रहने से सम्बन्धित
लोगों को निर्देश सख्त हैं,
जैविक प्रलय की रोकथाम में
भारत की सरकार व्यस्त है,
ख़त्म नहीं है जंग हमारी
न ही सूरज अभी अस्त है,
न तो हमने हार है मानी
न ही हमारा जोश खत्म है,
मिलकर लड़ेंगे जीतेंगे भी
दिल में ऐसे भाव व्यक्त हैं,
मुक्त कराएंगे उनको जो
कोरोना के पास ज़ब्त हैं,
Inspired By- Pandemic COVID-19 caused by virus, SARS-CoV-2 and it's aftermaths and agony.
-Nitin Pratap Singh
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