तुम्हारे साथ जब मैँ था मेरी औकात न समझी
मोहोब्बत से लिखे मेरे कभी अल्फाज न समझी
मेरे गीतों ने दुनियाँ में मुझे पहचान जब दे दी,
तो कहती हो नितिन देखो तुम्हे हूँ आज मैं समझी....
सफर एक बार तुमने साथ मेरे तय किया होता
अगर अच्छा नहीं लगता तो मुझसे कह दिया होता
कई साँचे थे जिनको प्यार से मैंने बनाया था,
उन्हें कुछ रूप मिल जाता जो तुमने पढ़ लिया होता
तुम्हारा साथ मिल जाता सफर फिर स्वर्ग हो जाता
अकेलेपन की मायुसी का भी फिर अंत हो जाता
मुझे मालूम है तुमने अकेले जीत पायी है ,
अगर तुम साथ हो जाते तो फिर इतिहास बन जाता
........अफसोस नहीं अभिमान कहो..
मोहोब्बत से लिखे मेरे कभी अल्फाज न समझी
मेरे गीतों ने दुनियाँ में मुझे पहचान जब दे दी,
तो कहती हो नितिन देखो तुम्हे हूँ आज मैं समझी....
सफर एक बार तुमने साथ मेरे तय किया होता
अगर अच्छा नहीं लगता तो मुझसे कह दिया होता
कई साँचे थे जिनको प्यार से मैंने बनाया था,
उन्हें कुछ रूप मिल जाता जो तुमने पढ़ लिया होता
तुम्हारा साथ मिल जाता सफर फिर स्वर्ग हो जाता
अकेलेपन की मायुसी का भी फिर अंत हो जाता
मुझे मालूम है तुमने अकेले जीत पायी है ,
अगर तुम साथ हो जाते तो फिर इतिहास बन जाता
........अफसोस नहीं अभिमान कहो..
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