शिक्षक
आज का दिन है तुम्हें समर्पित
तुमने हमें पढ़ाया है।चाहें ज्ञान हो,चाहें गुण हो,
तुमसे ही सब पाया है।
चमकी दुनिया तेज से जिनके ,
उनकी ही ये गाथा है,
तुमको देख के चाँद भी खुद में,
देखो आज लजाया है।
कल तक सीखा जो कुछ तुमसे,
उससे नाम कमाया है।
वजह सफल होने की तुम हो,
लोगों ने बतलाया है।
शत्-शत् नमन तुम्हें करते हैं,
देश के मानव संसाधन,
ऊपर वाले ने चुन-चुन कर,
ज्ञानी तुम्हें बनाया है।
जो मुमकिन था तुमने सौंपा,
हमको ॠणी बनाया है।
ज्ञान की गंगा को दुनिया में,
तुमने शतत् बहाया है।
सपने यहीं हकीकत बनते,
उनमें अगर सच बसता हो,
राधाकृष्णन का भी सपना,
पूरा होने आया है।
सच कहता हूँ तुम ही हो वो,
जिसमें विश्व समाया है।
(नितिन प्रताप सिंह).........एक पहल....haqiqatjindgiki.blogs.com

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