अनुभव
अगर तैराक अच्छा हो किनारा मिल ही जाता है
भटकती नाव को अक्सर सहारा मिल ही जाता है
अगर सिद्दत से चाहो अजनबी अनजान राही को
तो राही राह में अक्सर दोबारा मिल ही जाता है
कई संग्राम जीते अंत में कुछ काम न आया
हमारी रह में अकसर कभी अभिराम न आया
मगर जब मौत आई इक सिफारिश न चली मेरी
सिकंदए नाम भी मेरा मेरे कुछ काम न आया
अगर जब साथ अपने हों सफर छोटा सा लगता है
अगर कीमत न हो सिक्के की तो वो खोंटा सा लगता है
अगर अपना ही अपनों में बगावत का जहर भर दे
तो अपना शब्द भी अक्सर महज धोखा सा लगता है
…… ( नितिन प्रताप सिंह )
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