रक्षाबंधन
कद्र करना बहन की,आज दिन राखी का आया है।
ये है विश्वास का रिश्ता,मेरी माँ ने बताया है।
कलाई पर बँधा धागा बड़ी पहचान रखता है,
बहन की लाज तुम रखना,ये धागे ने बताया है।
मैं घर होता अगर तो,आज तेरे घर चला आता,
तू है नाराज कुछ मुझसे,हवाओं ने बताया है।
तेरी राखी मुझे कल ही मिली,और पूछने बैैठी,
तू खुद आया नहीं और खुद मुझे सिलचर बुलाया है।
बहन सिलचर से तेरा घर,बहुत लंबे सफर का है,
इसी किस्से को खुद भूगोल ने मुझको सुनाया है।
तू रहना ठीक से घर पर,मैं कुछ दिन बाद आऊँगा,
तेरी रछा का वादा जो किया,वो मैं निभाऊँगा।
तेरी राखी ने तेरे साथ का एहसास दिलाया है,
उसी एहसास का वरणन,कलम ने कर दिखाया है
कद्र करना बहन की, आज दिन राखी का आया है।
ये है विश्वास का रिश्ता,मेरी माँ ने बताया है.......
.......(नितिन प्रताप सिंह) ....
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