गुजारिश
तुम्हारे साथ गुजरे पल मुझे हर पल सताते हैं
तुम्हारी याद के नग्मे मेरे जज्बात गाते हैं
मैं तुमसे दूर आया हूँ तुम्हारे पास आने को
वहाँ तुम ठीक से रहना यहां हम मुस्कराते हैं
हमें मालूम है हम बिन तुम्हारा हाल कैसा है
वहा तुम रो लिया करती यहां हम भीग जाते हैं
अगर है सीखना तो सीख लो उन चंद लोगों से
जो अकसर दूर रहकर भी सभी रिश्ते निभाते हैं
बिना गतिरोध के ही प्यार मिलना खुशनसीबी है
कई तो जिंदगी भर प्यार करके कुछ न पाते हैं
हमारी याद आने पर कभी मायूस मत होना
तुम्हारे दुःख के चलते हम भी अकसर टूट जाते हैं
मुझे मोहलत अभी कुछ और दे दो ऐ मेरे हमदम
हर एक धड़कन में तुम ही हो तुम्हें फिर हम बताते हैं
अभी चलना है मुझको दूर तक तुम रोक मत लेना
सुना है हौसला अपनों का अपने ही बढ़ाते हैं ......
नितिन प्रताप सिंह haqiqatjindgiki.blogs.com
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