हार-जीत का खेल....
आज हम जो कह रहे हैं , कल वही सुनते थे हम,
जीत के स्वर्णिम तराने ,प्यार से बुनते थे हम,
हार की परछाइयाँ भी छू नहीं पाती थीं हमको,
जीत की धुन में हमेशा ,प्रेम से जीते थे हम,
आज हम कह रहे हैं ,कल वही सुनते थे हम ।
जीत के स्वर्णिम तराने ,प्यार से बुनते थे हम।
आज खुद को जान पाये ,खुद को पहचान पाये,
हर विजय मुमकिन है लेकिन ,मौत से कब
जीत पाये,
काल की परछांईयों से कौन है जो
पार पाये ,
मौत को किसने है देखा ,हाथ जीवन से मिलाये,
हार के बारे में कल तक कुछ नहीं सुनते थे हम
आज आलम ये हुआ कि हार में जीते हैं हम
आज हम जो कह रहे हैं ,कल वही सुनते थे हम ।
जीत के स्वर्णिम तराने प्यार से बुनते थे हम। ........
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जिंदगी |
जीत के स्वर्णिम तराने ,प्यार से बुनते थे हम,
हार की परछाइयाँ भी छू नहीं पाती थीं हमको,
जीत की धुन में हमेशा ,प्रेम से जीते थे हम,
आज हम कह रहे हैं ,कल वही सुनते थे हम ।
जीत के स्वर्णिम तराने ,प्यार से बुनते थे हम।
आज खुद को जान पाये ,खुद को पहचान पाये,
हर विजय मुमकिन है लेकिन ,मौत से कब
जीत पाये,
काल की परछांईयों से कौन है जो
पार पाये ,
मौत को किसने है देखा ,हाथ जीवन से मिलाये,
हार के बारे में कल तक कुछ नहीं सुनते थे हम
आज आलम ये हुआ कि हार में जीते हैं हम
आज हम जो कह रहे हैं ,कल वही सुनते थे हम ।
जीत के स्वर्णिम तराने प्यार से बुनते थे हम। ........

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