हवा के ख़ौफ के चलते,"दियों" को मत मिटा
देना।
ग़रीबी में हुए बुझते,चिरागों को बचा लेना।
अगर तकनीक और त्योहार में तकरार आ जाए,
उचित प्रतिभार अपनाकर,विवादों को मिटा देना।
अनैतिकता मिटाना ही,दिवाली की प्रतिष्ठा है,
अनाकर्षक,अहितकारी विचारों को जला देना।
दिवाली राजमहलों की तो हर दिन की कहानी है,
पटाखे "दान" के लेकर गरीबों में चला देना।
हमेशा दान के बदले नहीं प्रतिदान मिल पाता,
कभी वाजिब वजह से कीमती है वेवजह देना।
प्रचारक देश भक्ति के असल सरहद पे रहते हैं,
रज़ा अपनी है तुझसे,बस उन्हें लम्बी उमर देना।
हमारा क्या है हम जैसे,महज संवाद रचते हैं,
अगर कुछ कर सको तो बस इसे आगे बढ़ा देना।
हवा के ख़ौफ के चलते,"दियों" को मत मिटा देना।
ग़रीबी में हुए बुझते,चिरागों को बचा लेना।
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