1
अँधेरा बढ रहा है रोज ये सुनने मे आया है
हर एक मजलूम इसके खौफ से दहशत मे आया है
चिरागों की रिहाई अब हमें कैसे मुकम्मल हो?
सुना है साजिशों ने उनके घर पहरा बिठाया है
उजाले बेबसी की जिंदगी कब तक गुजारेगा
अगर आया नहीं जल्दी,अँधेरा मार डालेगा
कई आँखें भरोसे से मुझे हर रोज कहती हैं,
बहुत जल्दी उजाला घर में अपने लौट आएगा...
Comments
Post a Comment